जीवन को सार्थक बनाने के लिए "युक्ति" और "मुक्ति" का संगम क्यों ज़रूरी है? गुरु जंभेश्वर की शब्दवाणी आज के दौर में कैसे प्रासंगिक है? इन्हीं सवालों के साथ जांभाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर और विवेक विद्या मंदिर, सांचौर के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मंत्री श्री के.के. बिश्नोई समेत कई विद्वानों ने गुरु जंभेश्वर के दर्शन को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने पर ज़ोर दिया।
युक्तिपूर्वक जीवन जीएं : के.के. बिश्नोई
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि, राजस्थान सरकार के युवा, वाणिज्य, खेल एवं उद्योग मंत्री के.के. बिश्नोई ने गुरु जंभेश्वर भगवान की दिव्य वाणी और उनके 29 नियमों की आचार संहिता का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने "दोयम मन दोयम दिल सिवी न कथा" का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक मन एकाग्र नहीं होगा, तब तक किसी भी कार्य में कुशलता प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने युवाओं से युक्तिपूर्वक जीवन जीने का आग्रह किया।
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गुरु जंभेश्वर की राष्ट्रीय संगोष्ठी में के.के. बिश्नोई का संबोधन |
सदाचार ही है मोक्ष का रास्ता – सुखराम बिश्नोई
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्य मंत्री सुखराम बिश्नोई ने सदाचारयुक्त जीवन जीने की अपील करते हुए कहा कि यदि हमारा तन और मन स्वस्थ व शांत हैं, तो इसी जीवन में मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
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गुरु जंभेश्वर की राष्ट्रीय संगोष्ठी में सुखराम बिश्नोई का संबोधन एवं मंचासीन अतिथि |
नैतिकता के बिना ज्ञान अधूरा – हीरालाल विश्नोई
विशिष्ट अतिथि एवं सांचौर के पूर्व विधायक हीरालाल बिश्नोई ने सत्य के मार्ग पर चलते हुए नैतिक मूल्यों से युक्त जीवन जीने पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त विकास अधिकारी मोहनलाल बिश्नोई (रोटू) ने जीवन में नैतिकता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए।
जांभाणी साहित्य अकादमी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संगोष्ठी की विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. इंद्रा बिश्नोई ने गुरु जंभेश्वर के साहित्य के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए, अकादमी के कार्यक्रमों में अधिकाधिक भागीदारी की अपील की। पूर्व महासचिव प्रो. डॉ. सुरेंद्र खीचड़ ने संगोष्ठी की प्रस्तावना रखते हुए मुकाम में निर्माणाधीन साहित्य सदन हेतु अंशदान करने की अपील की।
मुख्य वक्ताओं के विचार:
विशिष्ट वक्ता डॉ. विष्णु दास वैष्णव ने नवधा भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भक्ति ही मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है।
विशिष्ट वक्ता डॉ. हुसैन खान शेख ने कहा कि गुरु जंभेश्वर भगवान की शब्दवाणी ही पुनर्जन्म से मुक्ति का मार्ग है।
श्री गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ निदेशक डॉ. ओम प्रकाश विश्नोई ने चिंता जताई कि "प्लास्टिक प्रदूषण ने हमारे जलस्त्रोतों और मिट्टी को ज़हरीला बना दिया है। गुरु जंभेश्वर ने प्रकृति को देवता माना था। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर जूट के थैले और तांबे के बर्तनों को अपनाना होगा।" संगोष्ठी के पंडाल में प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था इसी सोच का उदाहरण थी।
प्रो. डॉ. मिलन बिश्नोई ने जीवन जीने की कला पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु जंभेश्वर भगवान ने 29 नियमों की आचार संहिता एवं शब्दवाणी के माध्यम से युक्तिपूर्वक जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया है, जो मोक्ष प्राप्ति का साधन है।
प्रो. दिनेश खिलेरी (राजकीय महाविद्यालय, गुड़ामालानी) ने गुरु जंभेश्वर भगवान की शब्दवाणी को व्यक्तिगत जीवन मूल्यों से जोड़ने पर बल दिया।
एसीबीईओ भीखाराम बिश्नोई ने पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए बलिदानों का उल्लेख किया।
सम्मान एवं विमोचन:
इस अवसर पर जांभाणी साहित्य अकादमी के महासचिव विनोद जंभदास द्वारा संपादित पंचवर्षीय स्मारिका तथा डॉ. उदाराम खिलेरी द्वारा संपादित 'जंभवाणी की कुंडलियां' एवं 'जलते दीप' पुस्तकों का विमोचन किया गया।
संगोष्ठी में अर्थिक सहयोग प्रदान करने वाले भामाशाहों और जांभाणी साहित्य में पीएचडी प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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गुरु जंभेश्वर की राष्ट्रीय संगोष्ठी सांचौर |
प्लास्टिक मुक्त पंडाल:
स्वच्छ भारत अभियान के तहत 'कोशिश' पर्यावरण टीम ने तांबे के लोटों से पेयजल की व्यवस्था करते हुए पूरे पंडाल को प्लास्टिक मुक्त रखा, जिसकी सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन कुलदीप साऊ ने किया। अंत में बीरबल बिश्नोई ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया, जबकि संगोष्ठी संयोजक गोरधन राम बांगड़वा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
संगोष्ठी में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्वान व श्रोता उपस्थित रहे।
निष्कर्ष: युक्ति और मुक्ति का साथ
इस संगोष्ठी ने साबित किया कि गुरु जंभेश्वर की वाणी सिर्फ़ धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन का मार्गदर्शन है। जैसा कि श्री के.के. बिश्नोई ने कहा—"युक्तिपूर्वक जीवन जीने का मतलब है, हर कदम सोच-समझकर उठाना। तभी हम मुक्ति की ओर बढ़ सकते हैं।"
15वीं सदी में गुरु जंभेश्वर ने 29 नियमों के माध्यम से सामाजिक सदाचार, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक विकास का मार्ग दिखाया। इस संगोष्ठी का मकसद था कि उनकी "जुगती" (कुशलता) और "मुगती" (मोक्ष) की अवधारणा को आज के युवाओं तक पहुँचाया जाए।
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