पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास आज के युग की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और आपदा जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन चर्चा और शोध की आवश्यकता है। स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (SCDR), JNU एवं जांभाणी साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में "One-Day International Conference" का आयोजन 21 मार्च 2025 को होने जा रहा है।
इस सम्मेलन का प्रमुख विषय है—"प्रकृति संरक्षण और आपदा प्रबंधन: गुरु जंभेश्वर जी का सतत भविष्य हेतु दृष्टिकोण"। बिश्नोई पंथ के संस्थापक गुरु जंभेश्वर जी ने 15वीं शताब्दी में प्रकृति संरक्षण और नैतिक जीवनशैली की जो शिक्षाएं दीं, वे आज भी पर्यावरणीय स्थिरता और आपदा न्यूनीकरण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
यह सम्मेलन उन विद्वानों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को एक मंच प्रदान करेगा जो पारंपरिक ज्ञान, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), जैव विविधता संरक्षण, सामुदायिक पर्यावरण संरक्षण, और नीति निर्माण जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत करना चाहते हैं।
आप सभी शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और पर्यावरणविदों से अनुरोध हैं कि आप इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अवश्य भाग ले। शोध-पत्र प्रस्तुत करने और पंजीकरण से जुड़ी सभी जानकारियां नीचे दी गई हैं। आइए, गुरु जंभेश्वर जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए, एक सतत और पर्यावरण-संवेदनशील भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं!
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One-Day International Conference 2025 in JNU |
शोध-पत्र आमंत्रण (CALL FOR PAPERS):
विषय: "प्रकृति संरक्षण और आपदा प्रबंधन: गुरु जंभेश्वर जी का सतत भविष्य हेतु दृष्टिकोण (Protecting Nature, Preventing Disasters: Guru Jambheshwar Ji's Approach for Sustainable Futures)"
शोध-पत्र के उप-विषय (Sub-Themes for Paper):
- गुरु जंभेश्वर जी का दर्शन: सतत जीवनशैली के लिए एक रूपरेखा (Guru Jambheshwar Ji's Philosophy: A Framework for Sustainable Living)
- आधुनिक आपदा जोखिम न्यूनीकरण में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका (The Role of Traditional Wisdom in Modern Disaster Risk Reduction)
- सामुदायिक आधारित पर्यावरण संरक्षण: बिश्नोई समुदाय से सीखने योग्य पहलू (Community-Based Environmental Conservation: Lessons from the Bishnoi Community)
- जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलापन (Biodiversity Preservation and Climate Resilience)
- आस्था और पर्यावरणवाद: सतत विकास के आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Faith and Environmentalism: Spiritual Perspectives on Sustainability)
- स्वदेशी ज्ञान और सतत विकास लक्ष्य (SDGs) | Indigenous Knowledge and Sustainable Development Goals (SDGs)
- गुरु जंभेश्वर जी की शिक्षाओं के नीतिगत प्रभाव (Policy Implications of Guru Jambheshwar Ji's Teachings)
- पर्यावरण नैतिकता और भविष्य की स्थिरता (Ecological Ethics for a Resilient Future)
महत्वपूर्ण तिथियाँ (IMPORTANT DATES):
- 📅 05 मार्च - शोध सार (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि (Abstract submission)
- 📅 07 मार्च - पंजीकरण (Registration) की अंतिम तिथि
- 📅 10 मार्च - शोध-पत्र स्वीकृति अधिसूचना (Paper acceptance notification)
- 📅 15 मार्च - भुगतान की पुष्टि की अंतिम तिथि (Payment confirmation deadline)
- 📅 20 मार्च - पूर्ण शोध-पत्र (Full Paper) जमा करने की अंतिम तिथि (Full paper deadline)
- 📅 21 मार्च - ऑफलाइन-ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस की तिथि (Off-Online Conference date)
पंजीकरण (Registration):
- पंजीकरण शुल्क: ₹500/-
- QR कोड स्कैन करें और पंजीकरण करें
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Guru Jambheshwar Ji’s Teachings for Ecological Balance One-Day International Conference 2025 in JNU |
आयोजक (Organized By):
- स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (SCDR), JNU
- जांभाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर
स्थान (Venue):
- ऑडिटोरियम, स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (SCDR), JNU, नई दिल्ली
संपर्क (Contact Information):
- 📞 डॉ. दीप नारायण पांडेय (कॉन्फ्रेंस संयोजक, SCDR, JNU): +91-99680022440
- 📞 डॉ. नरेंद्र कुमार बिश्नोई (समन्वयक, जांभाणी साहित्य अकादमी): +91-9716311429